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घूमने के लिए सिर्फ 2 दिन हैं | उत्तराखंड का लैंसडाउन है पर्फेक्ट डेस्टिनेशन |

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    ये मॉनसून का समय है   और पहाड़ों में बहुत भारी बारिश हो रही है। मॉनसून के मौसम में पहाड़ों पर भारी बारिश की वजह से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मैंने सुना है कि बारिश की वजह से रास्ते उखड़ जाते हैं, टांसपोर्ट तक बंद हो जाता है। ऐसे जगह पर रहने वाले लोग बारिश के समय खुश कम और परेशानियों के लिए पहले से तैयार रहते हैं। जब पहाड़ों में बारिश होती है तो कहा जाता है कि इस समय यहाँ नहीं आना चाहिए। लेकिन बारिश ही तो पहाड़ों को खूबसूरती देती है। इस समय पहाड़ सबसे खूबसूरत लगता है। मैं भी पहाड़ों में उन लोगों के साथ रहना चाहता था और देखना चाहता था कि बारिश के दौरान किन-किन मुश्किलों से टकराना पड़ता है। मैंने हिमालय की तलहटी में जाने का फैसला लिया। मैंने इसके लिए ऐसी जगह चुनी जहाँ बहुत बारिश हो रही थी। वो जगह थी उत्तराखंड का फेमस हिल स्टेशन |   लैंसडाउन ।   बारिश दिखने में भले ही कितनी अच्छी लगती हो लेकिन जब बारिश में पहाड़ों में पैर बढ़ाने होते हैं तो ये बहुत ही मुश्किल काम होता है। लैंसडाउन जिसके बारे में कहा जाता है कि ये बेहद खूबसूरत है। यहाँ सभी बर्फ देखने आते हैं लेकिन मॉनसून के समय भी ये जगह

स्विट्जरलैंड घूमने के लिए भारत में ही बसे हैं 6 मिनी स्विट्जरलैंड

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   यूरोप का खूबसूरत देश स्विट्जरलैंड किसी जन्‍नत से कम नहीं है। भारत में भी ऐसी कई जगह हैं, जो आपको एकदम विदेश जैसी फीलिंग देंगी। इन्‍हें भारत में मिनी स्विट्जरलैंड के नाम से भी जाना जाता है। Mini switzerland of india looklike foreign places स्विट्जरलैंड घूमने के लिए नहीं पड़ेगी लाखों खर्च करने की जरूरत, भारत में ही बसे हैं 6 मिनी स्विट्जरलैंड बर्फ से ढके पहाड़ों, स्की रिसॉर्ट, झीलों और खूबसूरत नजारों के बीच स्विट्जरलैंड में छुट्टियां मनाना किसे अच्‍छा नहीं लगेगा। कई लोगों का सपना इस तरह के नजरों में छुट्टियां मनाने का होता है। लेकिन अगर बजट टाइट है, तो यह इच्‍छा अधूरी रह सकती है। अगर आपकी वाइफ स्विट्जरलैंड जाने की जिद कर रही है, तो आप उसे मना नहीं कर पाएंगे। तो क्‍यों न ऐसा तरीका ढूंढा जाए, जिससे उनका विदेश घूमने का ख्‍वाब भी पूरा हो जाए और आपका काम भी बन जाए। वैसे इस सपने को आप हकीकत में बदल सकते हैं । इसके लिए आपको पासपोर्ट की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। जी हां, भारत में ही कई डेस्‍टिनेशन ऐसे है, जो एकदम यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड जैसे दिखते हैं। तो आइए, यहां हम आपको भारत की ऐसी 6 जगहों के

जगन्नाथ धाम, पुरी की रसोई अत्यंत अद्भुत है |

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    172 साल पुराने इस मंदिर के एक एकड़ में फैली 32 कमरों वाली इस विशाल रसोई |   (150 फीट लंबी, 100 फीट चौड़ी और 20 फीट ऊँची) में भगवान को चढ़ाये जाने वाले महाप्रसाद को तैयार करने के लिए 752 चूल्हे इस्तेमाल में लाए जाते हैं… और लगभग 500 रसोइए तथा उनके 300 सहयोगी काम करते हैं। ये सारा प्रसाद मिट्टी की जिन सात सौ हंडियों में पकाया जाता है, उन्हें ‘अटका’ कहते हैं। लगभग दो सौ सेवक सब्जियों, फलों, नारियल इत्यादि को काटते हैं, मसालों को पीसते हैं। मान्यता है कि इस रसोई में जो भी भोग बनाया जाता है। उसका निर्माण माता लक्ष्मी की देखरेख में ही होता है। यह रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई के रूप में विख्यात है।यह मंदिर की दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है। भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है। मीठे व्यंजन तैयार करने के लिए यहाँ शक्कर के स्थान पर अच्छे किस्म का गुड़ प्रयोग में लाया जाता है।आलू, टमाटर और फूलगोभी का उपयोग मन्दिर में नहीं होता। जो भी व्यंजन यहाँ तैयार किये जाते हैं, उनके ‘जगन्नाथ वल्लभ लाडू’, ‘माथपुली’ जैसे कई अन्य नाम रखे जाते हैं।भोग में प्याज व लहसुन का प्रयोग निषिद्ध है। यहाँ रसोई के पास ही दो कु

पूर्वोत्तर के आखिरी गाँव में आखिर क्या है ख़ास? लोंगवा गाँव

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 लोंगवा गाँव  भारत को पूरे विश्व में विविधतापूर्ण संस्कृति आदि के अलावा यहाॅं के वंडर्स के लिए भी जाना जाता है। भारत में हमको बहुत से आश्चर्य (वंडर्स) देखने को मिल जाएँगे। भारत के पूर्वोत्तर इलाके के सात राज्यों को ‘सात बहनों (सेवेन सिस्टर्स)’ के नाम से जाना जाता है। पूर्वोत्तर का क्षेत्र भारत के उन इलाकों में से एक है जहाँ लोग ज़्यादातर घूमने जाया करते हैं और भारत की ख़ूबसूरती का आनन्द उठाते हैं। सात बहने शहरी शोर-शराबे से दूर गाँव की मन को आंदोलित करने वाली प्राकृतिक सौंदर्य प्रस्तुत करती हैं। इन्ही गाँव के बीच एक ऐसा गाँव हैं जहाँ के लोग खाना भारत में खाते हैं तो सोते किसी और देश में हैं।  लोंगवा पूर्वोत्तर का आश्चर्यजनक गाँव है जहाँ की ख़ूबसूरती किसी जन्नत से कमतर नहीं। उसमें भी हैरत की बात यह है कि यहाँ के लोग दो देशों की नागरिकता प्राप्त किए बैठे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यहाँ के मूल निवासी बॉर्डर की अवधारणा को मानते ही नहीं है। मोन टाउन से 42 किलोमीटर दूर इस गाँव को हर घुम्मकड़ को एक न एक बार ज़रूर एक्स्प्लोर करना चाहिए। कैसे जाएँ किसी भी राज्य से नागालैंड के लिए ट्रेन से जाएँ, फिर

उत्तराखंड में मौजूद है एक छोटा स्वर्ग, पहाड़ों पर घास के मैदान के बीच चोटी पर है परियों का मंदिर .

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5-10 नहीं बल्कि यहां एक ही पहाड़ी पर मौजूद हैं कुल 900 मंदिर, सुबह का नजारा देख उड़ जाएंगे होश!

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  हमारे देश भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थान हैं जिनकी एक झलक ही आज भी हमें गौरवान्वित तो करती ही है साथ ही इनमें से कई जगहें देखने वाले को इस सोच में डाल देती है कि आखिर इतने समय पहले बिना किसी आधुनिक यंत्रों के इन्हें कैसे बनाया गया होगा। ऐसे ही ऐतिहासिक स्थानों में कई प्राचीन और अद्भुत वास्तुकला वाले मंदिर भी हैं और आज के हमारे इस लेख में हम ऐसे ही अद्भुत मंदिरों के समूह की बात करने वाले हैं जो धार्मिक दृष्टि से तो एक बेहद महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है ही लेकिन इसके अलावा भी यहाँ से जुडी यह बात सभी को चौंका देती है कि यहाँ एक ही पर्वत पर 5-10 नहीं बल्कि करीब 900 मंदिर स्थापित हैं। एक ही पर्वत पर 900 मंदिर और वो भी सैंकड़ो साल पहले के बने हुए, यह बात हर किसी को सोच में डाल देती है। तो चलिए बताते हैं आपको इसके बारे में पूरी  पालीताणा तीर्थ स्थान, गुजरात जिस धार्मिक तीर्थ स्थान की हम बात कर रहे हैं वो है गुजरात के भावनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक नगर पालीताणा में शत्रुंजय पर्वत पर स्थित जैन धर्म का एक विशाल और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है। जैन धर्म के अनुसार प्राचीन काल से ही पालीताणा ज

ये है भारत की 5 बेहतरीन जगह जहाँ मॉनसून का मज़ा हो जाता है दुगना!

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ये है भारत की 5 बेहतरीन जगह जहाँ मॉनसून का म ज़ा हो जाता है दुगना! श्रेय- kapputravels.com अगर हिंदुस्तान एक नयी नवेली दुल्हन जैसी है तो मॉनसून उसके लिए एक बिंदी की तरह है जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देती है | हर शहर, हर गाँव हरियाली के आलम में मदमस्त हुआ रहता है | ऐसे में अगर आप सह-परिवार छुट्टी के लिए निकल जाएँ तो वो छुट्टी और भी यादगार बन जाती है | Tripoto की तरफ से ये मॉनसूनी तोहफा आपको मुबारक, और अपनी छुट्टी मनाने के लिए ये 5 अजब जगहों की पेशकश। 1. लोनावला श्रेय- www.kapputravels.com  लोनावाला! अगर आप मुंबई में रहते हैं तो आपके लिए मॉनसून में जाने वाली सबसे बढ़िया जगह है लोनावाला! मॉनसून की शुरुआत के साथ सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाएँ और हरे घाट, झरने और सुखद जलवायु और आकर्षक हो जातें हैं। शहर की हलचल से बचने के लिए मुंबई के इस खूबसूरत पहाड़ी इलाके की यात्रा की योजना बनाएँ।   कैसे पहुँचे -  लोनावला में अपना एक रेलवे स्टेशन है जहाँ पुणे और मुंबई से काफी गाड़ियाँ रोज़ आती हैं | सबसे पास एयरपोर्ट है पुणे में, जो वहाँ से 60 कि.मी. दूर है | और आप अगर मुंबई या पुणे से आ रहे हैं तो अपनी क